Saturday 6 December 2008

प्रतीक्षा के पल

जहाँ भी देखू तुम्ही हो हर ओर
प्रतीक्षा के पल फिर कहा किस ओर ......

चेहरे पर अरुणाई खिल जाती है
धड़कने स्पंदन बन मचल जाती है
यादों की बारिश में नाचे मन मोर...............

कब तनहा हूँ जब साथ तुम हो बन परछाई
साथ देख कर तुम्हारा खुदा भी मांगे मेरी तन्हाई
मेरे हर क्षण को सजाया तुमने चितचोर...............

मेरे संग चाँद भी करता रहता है इंतज़ार
तेरी हर बात को उससे कहा है मैंने कितनी बार
फिर भी सुनता है मुस्कुरा कर, जब तक न होती भोर.................

तुम्हारे लिए हूँ मैं शायद बहूत दूर
तुम पर पास मेरे जितना आँखों के नूर
मेरी सांसो को बांधे तेरे स्नेह की डोर ...................

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