Thursday 16 October 2008

अपना दर्द

अनदेखे सुख की आशा में, यौवन की दुपहरी बीत गयी !

राशन में प्यार मिला हमको, अधभरी गगरिया रीत गयी!!

छाया के भरोसे जी-जीकर , पल-पल की गिनती कर बैठे

अपने ही हाथों किस्मत पर, सब छोड़ किनारा कर बैठे............

जीवन के इस बीहड़ पथ पर चलते-चलते पग हार गए
बिखरे मोती अरमानो के अपने ही हमको मार गए...........

मंजिल ही नजर नहीं आती, और छोड़ न मिले किनारों का

अब दर्द मिला जीवन भर का, धोखा था चाँद सितारों का...............

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