Sunday, 12 October, 2008

मैंने तो चाँद सितारों की तमन्ना की थी

मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी
मुझको रातों की स्याही के सिवा कुछ न मिला

मैं वो नगमा हूँ जिसे प्यार की महफिल न मिली
वो मुसाफिर हूँ जिसे कोई भी मंजिल न मिली
जख्म पाए है बहारों की तमन्ना की थी

किसी गेसू के सिवा आँचल का सहारा भी नहीं
रास्तें में कोई धुंधला सा सितारा भी नहीं
मेरी नजरों ने नजारों की तमन्ना की थी

मेरी राहों से जुदा हो गयी राहें उनकी
आज बदली नज़र आती है निगाहें उनकी
जिनसे इस दिल ने सहारों की तम्मना की थी

प्यार माँगा तो सिसकतें हुए अरमान मिले
चैन चाहा तो उमड़ते हुए तूफ़ान मिले
डूबते दिल ने किनारों की तमन्ना की थी

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