Friday 2 April 2010

हाँ मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ

मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ
मिलके मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ
तुमसे मिलने के लिए नित नए बहाने ढूंढता हूँ
कभी दोस्त कभी कोई और, मैं दूसरो को ढूंढता हूँ
मैं हर बार छिपे हुए यह इजहार करता हूँ
हाँ मैं तुमसे मैं मिलना चाहता हूँ
मेरी इस बेकरारी की कोई सीमा नहीं है
मेरी इस तड़प का कोई अंत नहीं है
फिर भी मैं तुमसे यह कहने से डरता हूँ
हाँ मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ
मेरी नजर हर जगह तुम्हे ढूंढती है
मेरा मन हर बार कहता है तुम यहाँ आओगी
मेरा दिल हर बार मेरा साथ छोड़ता है
हर जगह हर पल वो तुम्हे ढूंढता है
यहाँ तक की अब मैं भी बदल रहा हूँ
अन्दर से तो तुम्हारा था
अब बाहर से तुम जैसा हो रहा हूँ
लेकिन फिर भी मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ
तुम मुझे रोज मिलती हो मेरे सपनो में
तुम मुझे इस जहा में कभी न मिलना
हाँ मेरे सपनो में तुम आती रहना
तुमसे मिलने के बाद शायद मैं तुमसे आँख ना मिला सकूँ
या मैं इतना खुश हो जाऊं मैं तुम्हे ही भूल जाऊं
मेरा सपना हकीकत बन गया और मैं खुद को भूल जाऊं
यह सब तुम्हे शायद तुम्हे पसंद आये या ना आये
इसलिए तुम मुझसे कभी ना मिलना
फिर मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ
मिलके मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ
हाँ मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ

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