Saturday 9 May 2009

गुलदस्ता

खुशबू की तरह आपके पास बिखर जाऊंगी,
सुकून बनकर दिल में उतर जाऊंगी,
महसूस करने की कोशिश कीजिये,
दूर होकर भी पास नज़र आऊंगी !


कितनी बेचैन है ये सांसे मेरी,
बिना तेरे, बहुत रोती है ये आँखें मेरी,
कब से मेरी आंखों को नींद आती ही नहीं,
बाहें मांगती है मुझसे रातें तेरी,
जान आ जाओ के अब दिल कहीं लगता ही नहीं,
तुमको बुला रही है ये बाहें मेरी !


जुबां खामोश आंखों में नमी होगी,
यही तो बस दास्तान - ए- ज़िन्दगी होगी,
भरने को तो हर ज़ख्म भर जाएगा,
पर कैसे भरेगी वो जगह,
जहाँ पर तुम्हारी कमी होगी !


आपके ख्यालों से फुर्सत नहीं मिलती,
एक पल की भी रुखसत नहीं मिलती,
मिल जाता है हमें सब कुछ,
बस देखने को आपकी सूरत नहीं मिलती !


आज तेरी यादों को सीने से लगा के रोये,
अपने ख्वाबों में तुझे पास बुलाके रोये,
हजारों बार पुकारा तुझे तन्हाइयों में,
और हर बार तुझे पास न पाकर रोये !!


तुम्ही हो न वो जिसके लिये मैं शाम-सुबू जिया,
तुम्हारी एक मुलाक़ात ने दिल को छू लिया,
बिना कुछ जाने ही दिल तुम्हें दे दिया,
नही मालूम, क्या था उस मुलाक़ात में,
जो अगर न मिले तुम, तो तुम्हे सपनों में बुला लिया !



हर शाम कह जाती है एक कहानी,
हर सुबह ले आती है एक नई कहानी,
रास्ते तो बदलते हैं हर दिन लेकिन,
मंजिल रह जाती है वही पुरानी !


शब्दों में दर्द, दिल में ज़ख्म,
आंखों में नहीं कोई आशा,
अलग नहीं उत्सव, मातम
खुशी या निराशा,
न कुछ खोने की,
न कुछ पाने की अभिलाषा,
फिर भी आज है कोई,
तेरे इश्क का प्यासा !


तेरे उस दिलकश चेहरे का,
तेरे संग बिताये हुए हसीन लम्हों का,
तेरे बेपनाह मोहब्बत का,
तेरे होठों के मीठे चुम्बन का,
मेरे रोम रोम में तेरा ही नशा छाया है,
बिन तेरे अब ये दिल एक पल न सुकून पाया है,
बस एक तू ही है जिसे मैंने अपनी जान से भी ज़ादा चाहा है,
ऐ मेरे जानम अब तू ही मेरी जीने की वजह है,
तुझी से ज़िन्दगी का आगाज़ और...
तुझी पे मर मिटने की तमन्ना है !!



न तस्वीर है तुम्हारी जो दीदार किया जाए,
न तुम पास हो जो प्यार किया जाए,
ये कौन सा दर्द दिया है आपने,
न कुछ कहा जाए, न तुम बिन रहा जाए!


मिटटी से हवा आने लगी अभी अभी,
क्या आपने याद किया अभी अभी?
आपसे कब मिलेंगे पता नहीं,
फिर भी यूँ लगता है आप मिलकर गए अभी अभी !

भूल अगर कोई हो गई हो हमसे,
रूठकर ना रुखसत हो जाना मुझसे,
भूल समझकर भूल को माफ़ कर देना,
भूल के भी हमें न भुलाना !


वो पहली मुलाकात, वो पहली मुस्कराहट,
वो पहली गुफ्तगू, वो हसीन पल,
वो अपनापन, वो चाहत का एहसास,
वो दिल की तड़प, वो नायाब यादें,
बस इन्ही यादों के सहारे जी रहे हैं हम,
और इन्ही पलों के लिए मर मिट सकते हैं हम !



दिल की हालत की तरफ़ किसकी नज़र जाती है,
प्यार की उमर तमन्नाओ में गुज़र जाती है,
मैं रो पड़ती हूँ जब याद तुम्हारी आती है,
ज़माना हँसता है जब मोहब्बत रूठ जाती है !



वो नहीं है साथ हमारे पर आज भी है उनका नशा,
न बचे सुर, न बचे शब्द पर आज भी है एक नगमा,
आज भी है राहें, आज भी एक मंजिल, जुदा हो गए हमराह,
न बचा जिस्म, न बचा जिगर, पर आज भी है एक आह !!


आपके प्यार ने ज़िन्दगी को एक मकसद दिया है,
हर सुख दुःख में मैंने आपका एहसास किया है,
जब भी झपके पलक आपकी तो समझ लेना,
आपकी जान ने आपको याद किया है !!



हम अपनी दोस्ती को यादों में सजायेंगे,
दूर रहकर भी बंद आंखों में नज़र आयेंगे,
हम कोई वक्त नहीं जो बीत जायेंगे,
जब याद करोगे तब चले आयेंगे !!


लबों पे आज उनका नाम आ गया,
प्यासे के हाथ जैसे जाम आ गया,
डोले कदम तो गिरा उनकी बाँहों में जाकर,
आज हमारा पीना ही हमारे काम आ गया !



कितनी जल्दी मुलाक़ात गुज़र जाती है,
प्यास बुझती नहीं और बरसात गुज़र जाती है,
आपकी यादों से कहदो इस तरह आया न करे,
नींद आती नहीं और रात गुज़र जाती है !


चाहत है आपकी चाहत को पाने की,
चाहत है चाहत को आजमाने की,
आप चाहे न चाहे पर,
चाहत है आप की चाहत में मिट जाने की !!


तन्हाइयों में तुमको ही याद करते हैं,
तुम सलामत रहो यही फरियाद करते हैं,
हम तुम्हारे ही मोहब्बत का इंतज़ार करते हैं,
तुम को क्या पता हम तुमको कितना प्यार करते हैं !

चाह था जिसे उसे भुलाया न गया,
ज़ख्म दिल का लोगों से छुपाया न गया,
बेवफाई के बाद भी इतना प्यार करता है दिल उसे,
की बेवफाई का इल्जाम भी उस पर लगाया न गया...


एक शमा अंधेरे में जलाये रखना,
सुबह होने को है माहौल बनाये रखना,
कौन जाने वो किस गली से गुज़रे,
हर गली को फूलों से सजाये रखना !


काश ऐसा हो के तुमको तुमसे चुरा लूँ,
वक्त को रोककर वक्त से एक दिन चुरा लूँ,
तुम पास हो तो इस रात से एक रात चुरा लूँ,
तुम साथ हो तो ये जहाँ चुरा लूँ !



थक गए हम उनका इंतज़ार करते करते,
रोये हज़ार बार ख़ुद से टकरार करते करते,
दो लफ्ज़ उनकी जुबां से न निकले और,
टूट गए हम एक तरफा प्यार करते करते !


ज़माने से नहीं, तन्हाई से डरते हैं,
प्यार से नहीं, रुसवाई से डरते हैं,
मिलने की उमंग बहुत होती है दिल में लेकिन,
मिलने के बाद तेरी जुदाई से डरते हैं !


मांगी थी दुया आशियाने की,
चल पड़ी आंधियां ज़माने की,
मेरे गम कोई न समझ सका,
क्यूंकि मेरी आदत थी मुस्कुराने की !


फूल खिलते हैं, बहारों का समा होता है,
ऐसे मौसम में ही तो प्यार जवा होता है,
दिल की बातों को होठों से नहीं कहते,
ये अफसाना तो निगाहों से बयान होता है !


वो तो पानी की बूँद है जो आंखों से बह जाए,
आंसू तो वो है जो आंखों में ही रह जाए,
वो प्यार क्या जो लफ़्ज़ोह में बयान हो,
प्यार तो वो है जो आंखों में नज़र आए !


मोहब्बत के बिना ज़िन्दगी फिजूल है,
पर मोहब्बत के भी अपने उसूल हैं,
कहते हैं मिलती है मोहब्बत में बहुत उल्फतें,
पर आप हो महबूब मेरे तो सब कुबूल है !



दिल की आवाज़ को इज़हार कहते हैं,
झुकी निगाहों को इकरार कहते हैं,
सिर्फ़ जताने का नाम इश्क नहीं,
किसीको यादों में जीने को भी प्यार कहते हैं !


चाहा था जिसे उसे भुलाया न गया,
ज़ख्म दिल का लोगों से छुपाया न गया,
बेवफाई के बाद भी इतना प्यार करता है दिल उसे,
के बेवफाई का इल्जाम भी उस पर लगाया न गया !


आज फिर तेरी याद आयी बारीश को देखकर,
दिल पे ज़ोर न रहा अपनी बेबसी को देखकर,
रोये इस कदर तेरी याद में,
के बारीश भी थम गयी मेरी बारीश देखकर !



साहिल पर खरे खरे हमने शाम कर दी,
अपना दिल और दुनिया आपके नाम कर दी,
ये भी न सोचा कैसे गुजरेगी ज़िन्दगी,
बिना सोचे समझे हर खुशी आपके नाम कर दी!

तुझे अपना मुकद्दर बताते हैं हम,
खुदा के बाद तेरे आगे सर झुकाते हैं हम,
ये रिश्ता कभी तोर न देना,
जिस रिश्ते के दम पर मुस्कुराते हैं हम !


चेहरे पे हँसी छा जाती है,
आंखों में सुरूर आ जाता है,
जब तुम मुझे अपना कहते हो,
आँखें मेरी शर्मा ही जाती है !


ज़िन्दगी शुरू होती है रिश्तों से,
रिश्ते शुरू होते हैं प्यार से,
प्यार शुरू होता है अपनों से,
और हम शुरू होते हैं आपसे!


समंदर के साथ साहिल,
फूल के साथ खुशबू,
जिस्म के साथ रूह,
शमा के साथ परवाना,
खुशी के साथ गम,
और आपके साथ हम..!


क्यूँ नजरे चुराए बैठे हो,
क्यूँ दिल को दबाये बैठे हो!
अरे हम इतने भी बुरे नहीं,
जो जनाब हमे भुलाये बैठे हो...!


ये तन्हाईयाँ जो सजी है तेरे ख्यालों से,
इनसे ये रात यूँही सजती रहे,
ये अकेलापन जो तुमसे दूरी का एहसास है,
ये दूरियां तेरे दीदार की उम्मीद से सजती रहे!


कुछ बीते हुए लम्हों से मुलाकात हुई,
कुछ टूटे हुए सपनों से बात हुई,
याद जो करने बैठे उन तमाम यादों को,
तो आपकी यादों से शुरुयात हुई !



हर इश्क का मतलब गम नहीं होता,
दूरियों से प्यार कम नहीं होता,
वक्त बेवक्त हो जाती है आखें नम,
क्यूंकि यादों का कोई मौसम नहीं होता !


दिल ने दिल को पुकारा है,
होठों पर नाम तुम्हारा आया है,
दिल की चाहत ने पुकारा है,
आखों के सामने चेहरा तुम्हारा आया है,
मुझे पता है के तुम आओगे,
बार बार ख्याल मन् में आया है !


हर लम्हा एक ख्याल,
हर ख्याल एक सवाल,
हर सवाल एक जवाब,
हर जवाब एक उम्मीद,
हर उम्मीद एक सपना,
हर सपना एक अरमान,
हर अरमान एक याद,
हर याद में सिर्फ़ और सिर्फ़ आप!!


इस कदर हमारी चाहत का इम्तीहान मत लीजिये,
क्यूँ हो खफा ये बयान तो कीजिये...
कर दीजिये माफ़ अगर हो गई कोई खता,
यूँ ही याद न करके सज़ा तो न दीजिये...!!!



तेरे हर अल्फाज़ में वो कशिश है,
जो मेरे रूह को महका जाता है,
तुझे उम्र भर पाने की ख्वाइश है,
ये मेरा जूनून नहीं बेपनाह मोहब्बत है!


इकरार में शब्दों की एहमीयद नहीं होती,
दिल के जज़्बात की आवाज़ नहीं होती,
आँख बयां कर देती है दिल की दास्ताँ,
मोहब्बत लफ्जों की मोहताज नहीं होती!



लम्हे ये सुहाने साथ हो न हो,
कल में आज जैसी बात हो न हो,
आपकी दोस्ती हमेशा इस दिल में रहेगी,
चाहे सारी उम्र मुलाकात हो न हो!


ए जानेमन, तू ही है मेरा तनमन,
तुझी से जुरा है मेरे दिल की धड़कन,
ये दिल पुकार रहा है सिर्फ़ तुझे,
आकर अपनी आहोश में ले ले मुझे!!


मोहब्बत का इम्तिहान आसान नहीं,
प्यार सिर्फ़ पाने का नाम नहीं,
मुद्दत बीत जाती है किसीके इंतज़ार में,
ये सिर्फ़ एक पल दो पल का काम नहीं!!


सिर्फ़ चाहने से कोई बात नहीं होती,
सूरज के सामने कभी रात नहीं होती,
हम चाहते हैं जिन्हें जान से भी जादा,
वो सामने है पर बात भी नहीं होती!


तुम मुझे भूल न पाओगे,
इस कदर हम तुम्हें याद आयेंगे...
यकीन न आए तो आईने में देखना,
तेरी आंखों में हम नज़र आयेंगे!


राह में जब तुमसे निगाहें टकराई,
दिल में मेरे हलचल सी मच गयी,
कैसे बताऊँ उस पहली मुलाकात का अंजाम,
तुम्हारे एक दीदार के इंतज़ार में मैं हो गयी गुमनाम!


काश! ये जालिम जुदाई न होती,
रब्बा तूने ये चीज़ बनाई न होती!
न हम उनसे मिलते न प्यार उनसे होता,
तो ये ज़िन्दगी जो अपनी थी, वो परायी न होती!


लहर आती है, किनारे से पलट जाती है,
याद आती है, दिल में सिमट जाती है,
दोनों में फरक सिर्फ़ इतना है,
लहर बेवक्त आती है, और याद हर वक्त आती है!


फिजा में महकती एक शाम हो तुम,
प्यार में छलकता जाम हो तुम
सीने में छुपाये फिरते हैं हम याद तुम्हारी,
मेरी ज़िन्दगी का दूसरा नाम हो तुम!


सोचा न था की कभी दोस्ती होगी
दिल जिसके लिए रो सके वैसी उल्फत होगी
अब जन्नत की गलियों का रास्ता क्यूँ देखूं
जहाँ तुम हो वहीँ से जन्नत शुरू होगी॥!!



ओस की बूँदें हैं, आखों में नमी है,
न ऊपर आसमान है और न नीचे ज़मीन है,
ये कैसा मोड़ है ज़िन्दगी का,
जो लोग खास है बस उन्ही की कमी है!


रातें गुमनाम होती है,
दिन किसीके नाम होता है,
हम ज़िन्दगी कुछ इस तरह जीते हैं,
हर लम्हा आप ही के नाम होता है!


उनकी भूली-बिसरी वो कैसी यादें थी
यादें क्या थी ख़ुद से मुलाकातें थी
मन् की गहराई में डूबी देखती रही
सीप में मोती से महँगी उनकी बातें थी!


एक फूल काफी है कबर पर चढाने को,
हजारों फूल कम है डोली सजाने को,
हजारों खुशियाँ कम है एक गम भुलाने को,
और एक गम काफी है ज़िन्दगी भर रुलाने को!


आज ये कैसी उदासी छाई है
तन्हाई के बादल से भीगी जुदाई है,
रोया है फिर दिल मेरा
नजाने आज किसकी याद आई है!


रहते हैं साथ साथ मैं और मेरी तन्हाई
करते हैं राज़ की बात मैं और मेरी तन्हाई
दिन तो गुज़र ही जाता है लोगों की भीर में,
करते हैं बसर रात में मैं और मेरी तन्हाई!


तेरी वफ़ा ने मुझे ख़ुद और सितम करने न दिया
जो आए पलकों पर मोती उन्हें झरने न दिया
मैंने समझा है खुदको सदा अमानत तेरी,
इसी ख्याल ने मुझको कभी मरने न दिया!


चिरागों से अंधेरे दूर हो जाते
तो चाँद की चाहत हमें न होती
अगर कट सकती यह ज़िन्दगी अकेले
तो हमें आपकी ज़रूरत नहीं होती!


वादा किसीसे करने की ज़रूरत ही क्या थी जो निभा न सके,
किया ही क्यूँ था प्यार जब जता न सके,
यूँ तो बातें बहुत बड़ी की थी तुमने,
पर ऐसा सफर कैसा जो साथ उमर भर चल न सके!


दिल की आवाज़ को इज़हार कहते हैं,
झुकी निगाह को इकरार कहते हैं,
सिर्फ़ पाने का नाम इश्क नहीं,
कुछ खोने को भी प्यार कहते हैं!


कैसे कहूं की अपना बना लो मुझे
बाँहों में अपनी समां लो मुझे

बिन तुम्हारे एक पल भी अब कटता नहीं
तुम आकर मुझी से चुरा लो मुझे

ज़िन्दगी तो वो है संग तुम्हारे जो गुज़रे
दुनिया के ग़मों से अब चुरा लो मुझे

मेरी सबसे गहरी ख्वाइश हो पूरी
तुम अगर पास अपने बुलालो मुझे

ये कैसा नशा है जो बहका रहा है
तुम्हारा हूँ मैं तो संभालो मुझे

नजाने फिर कैसे गुजरेगी जिंदगानी
अगर अपने दिल से कभी तुम निकालो मुझे

सभी नगमें साज़ में गाये नहीं जाते,
सभी लोग महफ़िल में बुलाये नहीं जाते,
कुछ पास रहकर भी याद नहीं आते,
कुछ दूर रहकर भी भुलाये नहीं जाते!


दिल के करीब आके वो जब दूर हो गए,
सारे हसीन ख्वाब मेरे चूर हो गए,
हमने वफ़ा निभाई तो बदनामियाँ मिली,
जो लोग बेवफा थे वो मशहूर हो गए!


बहुत चाहा पर उनको भुला न सके,
ख्यालों में किसी और को ला न सके,
उनको भुलाके आसूं तो पोंछ लिए,
पर किसी और को देखकर मुस्कुरा न सके!


कभी दिल को, कभी शमा को जलाकर रोये
तेरी यादों को सीने से लगाकर रोये...
रात की गोद में जब सो गई दुनिया सारी,
तो चाँद को तस्वीर बनाकर रोये !



सबके दिलों में हो सबके लिए प्यार
आनेवाला हर दिन लाये खुशियों का त्यौहार
इस उम्मीद का साथ आओ भूलके सारे गम
न्यू इयर २००९ को हम सब करे वेलकम


कल हो आज जैसा
महल हो ताज जैसा
फूल हो गुलाब जैसा
और...
ज़िन्दगी के हर कदम पे साथ हो
साथ हो आप जैसा


बेताब तमन्नाओ की कसक रहने द्दो
मंजिल को पाने की झलक रहने द्दो
आप भले ही रहो दूर नज़रों से
पर बंद पलकों में अपनी झलक रहने द्दो


खुशबू की तरह आपके पास बिखर जाउंगी
सुकून बनकर दिल में उतर जाउंगी
ज़रा महसूस करने की कोशिश कीजिये
दूर होकर भी पास नज़र आउंगी


दोस्ती है वो चिराग
जो जलता ही रहेगा
बुझाना चाहे ज़माना
पर बुझा न सकेगा



ढलती शाम है तनहा,
आँखों में प्यास है,
बिना तुम्हारे हर एक लम्हा,
जिन्दगी कितनी उदास है !

1 comment:

Shamikh Faraz said...

amit ji aap bahut sundar likhte hain. agar aap k pas koi prerna se bhari koi kavita ho to mere blog par bheje.
agar waqt mile to mera blog bhi dekh